माननीय कैलाश सत्यार्थी.
शांती नोबेल पुरस्कार विजेता,
भारत.
शत शत प्रणाम!
बहुत दिनो बाद आज आपकी याद आयी है | मौका भी तो वैसा है | गये कुछ दिनो से भारतवर्ष में जो कुछ हो रहा है उस बीच आप कही भी नजर नही आये,सोचा चलो आपको तो याद आती नही तो क्यू ना हम हि आपसे बात कर ले| बहुत दिनो बाद अपने देश को आपके रूप पे नोबेल अवार्ड मिला,और वो भी 'शांती' नोबेल अवार्ड| पुरे दुनिया को शांतीके मार्ग से कैसे जिता जा सकता है ये आपने दिखा दिया| जब पुरा देश गोमांस के बनावट काली करतुद से दुनिया में बदनाम हो रहा है, तब आप कही दिखाई नही दे रहे| अखलाक अहमद को पिटपिट के मारा दीया गया ,इसके बाद अपने देश के जागृत साहीत्यकारोने उन्हे नवाजे गये पुरस्कारोको वापस करते हुए देश कि अखंडता के खिलाफ काम करने वाली फासिस्त शक्ती को जोरदार तमाचा दिया | इस बीच भी आप कही नही दिखे| कल फरीदाबाद में एक दलित परिवार के घर को जला दिया गया, इस बीच में दो मासूम बच्चो कि मौत हो गयी, आप तो बच्चो के लिये काम करते हो, इस बीच भी आप कही नही दिखे| शायद, दलित बच्चे आपके सो कोल्ड 'बचपन बचाव आंदोलन' का हिस्सा नही है, इसीलिये उनका बचपन जातीवाद के आंग में जलता रहा, तब भी आप कही नही दिखे| अगर आप भूल गये हो तो याद दिलाता हुं, आपके साथ पाकिस्तान कि मलाला युसुफजाई को भी शांती का नोबेल अवार्ड मिला, जो देश अपने स्थापना से कभी भी एकदिल से रेह नही पाये, उन दो देशो को साथसाथ नोबेल पुरस्कार मिलना आश्चर्य कि बात थी| तब शायद लगा कि अब दोनो देशो के बीच शांतता प्रक्रिया अब आग बढेगी| पर जब गुलाम अली खान साहब के संगीत समारोह को शिवसेना नामक कोई उग्रवादी संघटन विरोध कर रहा था, तब भी आप कही नही दिखे| डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, कॉ. गोविंद पानसरे, प्रा. कलबुर्गी जैसे प्रोग्रेसिव विचारधारा के लोगो कि दिनदहाडे बंदूक कि गोलीसे हत्या हो रही थी, लोग सडको पे उतरकर विरोध कर रहे थे, तब भी आप कही दिखाई नही दिये|
गये साल मुंबई में हुई इंडियन सायन्स कॉंग्रेस में पत्रकार परिषद में मैने आपको सवाल किया था, कि क्या अब पाकिस्तान और भारत को नोबेल मिलने के बाद दोनो देशो में शांतिवार्ता होगी? तब आपने बडे चालाखी से जवाब दिया था कि, में मलाला को अपनी बेटी मानता हुं| कोई पिता और कोई बेटी सीमापर बैठकर अगर शांतिवार्ता होती तो सब सवाल खतम हो जाते| चलो दो देशो के बीच में अमन कि बात चलाना ये मुश्किल बात हो सकती है,पर अपने देश का क्या? नोबेल पुरस्कार लेने के बाद दिये हुए भाषण में आपने वेदो में लिखी हुई कुछ पंक्तीया सुनाई,और अपना देश कितना सहिष्णू है इसका दाखिला दिया| अपना देश गांधी और बुद्ध कि भूमी है ऐसा भी आपने कहा, पर जब खुले आम मानवता कि हत्या हो रही है, गांधीजी के खुनी को देशभक्त कहा जा रहा है, तब आप कहा हो? आपको हालही में 'जागतिक मानवियता पुरस्कार' से हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने सम्मानित किया,सून कर बडा हर्ष हुवा| लेकिन जब आपको मानवियता पुरस्कार मिल रहा था तब अपने देश के अल्पसंख्यांक मुस्लिम और दलित लोग हिंदुत्ववादी संघटन के अमानवीय कृत्योसे लड रहे थे| शायद इससे आप गुमराह होगे, आपने ये बात नजरंदाज कि ऐसा हम नही कहेंगे|
ये सब बताने का कष्ट कर रहा हुं क्योकी अपने देश में शांतता का नोबेल पुरस्कार प्राप्त आदमी है ये लोग भूल गये है , और शायद लोगो के साथ आप भी ये महत्वपूर्ण बात भूल गये हो | यही बात आपको याद दिलानी थी,बाकी कुछ नही| देखिये, वक्त मिल जाये तो अपने देश में हो रहे अमानवी कृत्यो के बारे में भी बात करे| नही तो आनेवाले वक़्त मै 'शांती' कि कोई एहमियत नही रहेगी|
शांती- अमन का चहिता और भारत देश का एक नागरिक
सागर

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